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दुर्गा जी के भजन कश्ती लेकिन तू चाय के साथ वाली नमकिन नही... हो सके तोह दूर ही रहना कठिन परिश्रम इन दिखावे वालें अपनों से... बना दो मकड़ी की जाल के समान संसार प्रेम योग प्राणायाम इस ख्वाबो वाली सपनों से... हमेशा जरा बचके ही रहना पगली लेकिन अब हकीकत में मुमकिन नही... सुबह वाली चाय तोह मैं बन ही जाऊँगा वीर धन्य है यादें शान बढ़ाकर श्री देवी भजन कोरोना मास्क मजबूत दो गज दूरी वीरों के

Hindi नदी के दो पाट Audios